7 नवंबर 2022 सोमवार को चतुर्दशी तिथि शाम 4:18 तक रहेगी, उसके उपरांत पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो जाएगी जो अगले दिन 8 नवंबर, मंगलवार शाम 4:32 तक रहेगी।
लेकिन 8 नवंबर को चंद्रग्रहण होने की वजह से पूर्णिमा के सभी कार्यक्रम 7 नवंबर सोमवार को रखे जाए तो ज्यादा उचित रहेगा।
अतः पूर्णिमा का व्रत 7 नवंबर सोमवार को रखना ज्यादा श्रेष्ठ रहेगा। 7 नवंबर को प्रात:काल से देर रात तक सिद्ध योग व रवि योग जैसे अच्छे योग भी रहेंगे।
जो लोग व्रत का उद्यापन करेंगे, उनको 7 नवंबर को ही उद्यापन करना चाहिए।
7 नवंबर को ही देव दिवाली मनाई जाएगी। अतः इस दिन दीपदान शाम प्रदोष काल में 5:14 से शाम 7:49 तक करना श्रेष्ठ रहेगा।
7 नवंबर को ही गंगा स्नान भी रहेगा अतः इस दिन प्रातःकाल पवित्र नदी व सरोवर में स्नान करने के शुभ फल प्राप्त होते हैं।।
*⚛️कार्तिक पूर्णिमा में इन बातों का रखें ध्यान-:*
-कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में ही स्नान करें, यदि नदी स्नान किसी कारणवश संभव न हो तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
2- इस दिन स्नान करते समय सभी तीर्थों का ध्यान करना चाहिए।
3- स्नान करने के बाद सबसे पहले सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
4- कार्तिक पूर्णिमा के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करें और "ऊं नम: शिवाय" मंत्र का जाप करें।
5- स्नान के बाद जरूरतमंदों में फल, अन्न और वस्त्र का दान जरूर करें।।
6-इस दिन गायों को कुछ खाने को जरूर दें। गौशाला में गुड व हरा चारा इत्यादि दान करें।।
7-इस दिन भगवान श्रीहरि की स्तुति आराधना करें, मौन का ज्यादा से ज्यादा पालन करें।
8-कार्तिक पूर्णिमा को संभव हो सके तो घर पर भगवान सत्नारायण की कथा रखें। इस दिन भगवान श्री हरि के मंत्रों व पवित्र नामों का जप करें। यथासंभव गीता के पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम, गोपाल सहस्त्रनाम आदि पाठ करें।
9-कार्तिक पूर्णिमा के दिन सात्विक व शुद्ध आचरण वाले किसी ईश्वर आराधक (ब्राह्मण) को भोजन करवाएं व दान दक्षिणा दें।।
10- कार्तिक पूर्णिमा की संध्या प्रदोष काल में दीपदान करें, देव दीपावली मनाएं। घर में व तुलसी, पीपल, आंवला जैसे पवित्र वृक्षों के नीचे, नदी व सरोवरों के पास और मंदिर में दिए जलाएं।
11-कार्तिक पूर्णिमा के दिन भूल कर भी किसी इंसान, जीव-जंतु, पेड़-पौधो को किसी तरह का नुकसान ना पहुंचाएं।।
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